All Astrology Solutions

All Astrology Solutions

All Astrology Solutions
Shri Vishnu Stotra

॥ श्री विष्णु स्तोत्र ॥
॥ Shri Vishnu Stotra ॥

॥ ॐ गण गणपतये नमः ॥

राजोवाच
वाक्पुष्पेण कथं ब्रह्मन् ब्रह्माप्यर्चितवान् हरिम् ।
तन्मे कथय विप्रेन्द्र ब्रह्मोक्तं स्तोत्रमुत्तमम् ॥

मार्कण्डेय उवाच
श्रृणु राजन् प्रवक्ष्यामि स्तोत्रं ब्रह्ममुखेरितम् ।
सर्वपापहरं पुण्यं विष्णुतुष्टिकरं परम् ॥
तमाराध्य जगन्नाथमूर्ध्वबाहुः पितामहः ।
भूत्वैकाग्रमना राजन्निदं स्तोत्रमुदीरयत् ॥

ब्रह्मोवाच
नमामि देवं नरनाथमच्युतं नारायणं लोकगुरुं सनातनम् ।
अनादिमव्यक्तमचिन्त्यमव्ययं वेदान्तवेद्यं पुरुषोत्तमं हरिम् ॥ १॥
आनन्दरूपं परमं परात्परं चिदात्मकं ज्ञानवतां परां गतिम् ।
सर्वात्मकं सर्वगतैकरूपं ध्येयस्वरूपं प्रणमामि माधवम् ॥ २॥

भक्तप्रियं कान्तमतीव निर्मलं सुराधिपं सूरिजनैरभिष्टुतम् ।
चतुर्भुजं नीरजवर्णमीश्वरं रथाङ्गपाणिं प्रणतोऽस्मि केशवम् ॥ ३॥
गदासिशङ्खाब्जकरं श्रियः पतिं सदाशिवं शार्ङ्गधरं रविप्रभम् ।
पीताम्बरं हारविराजितोदरं नमामि विष्णुं सततं किरीटिनम् ॥ ४॥

गण्डस्थलासक्तसुरक्तकुण्डलं सुदीपिताशेषदिशं निजत्विषा ।
गन्धर्वसिद्धैरुपगीतमृग्ध्वनिं जनार्दनं भूतपतिं नमामि तम् ॥ ५॥
हत्वासुरान् पाति युगे युगे सुरान् स्वधर्मसंस्थान् भुवि संस्थितो हरिः ।
करोति सृष्टिं जगतः क्षयं यस्तं वासुदेवं प्रणतोऽस्मि केशवम् ॥ ६॥

यो मत्स्यरूपेण रसातलस्थितान् वेदान् समाहृत्य मम प्रदत्तवान् ।
निहत्य युद्धे मधुकैटभावुभौ तं वेदवेद्यं प्रणतोऽस्म्यहं सदा ॥ ७॥
देवासुरैः क्षीरसमुद्रमध्यतो न्यस्तो गिरिर्येन धृतः पुरा महान् ।
हिताय कौर्मं वपुरास्थितो यस्तं विष्णुमाद्यं प्रणतोऽस्मि भास्करम् ॥ ८॥

हत्वा हिरण्याक्षमतीव दर्पितं वराहरूपी भगवान् सनातनः ।
यो भूमिमेतां सकलां समुद्धरंस्तं वेदमूर्तिं प्रणमामि सूकरम् ॥ ९॥
कृत्वा नृसिंहं वपुरात्मनः परं हिताय लोकस्य सनातनो हरिः
जघान यस्तीक्ष्णनखैर्दितेः सुतं तं नारसिंहं पुरुषं नमामि ॥ १०॥

यो वामनोऽसौ भगवाञ्जनार्दनो बलिं बबन्ध त्रिभिरूर्जितैः पदैः ।
जगत्रयं क्रम्य ददौ पुरंदरे तदेवमाद्यं प्रणतोऽस्मि वामनम् ॥ ११॥
यः कार्तवीर्यं निजघान रोषात् त्रिस्सप्तकृत्वः क्षितिपात्मजानपि ।
तं जामदग्न्यं क्षितिभारनाशकं नतोऽस्मि विष्णुं पुरुषोत्तमं सदा ॥ १२॥

सेतुं महान्तं जलधौ बबन्ध यः सम्प्राप्य लङ्कां सगणं दशाननम् ।
जघान भृत्यै जगतां सनातनं तं रामदेवं सततं नतोऽस्मि ॥ १३॥
यथा तु वाराहनृसिंहरूपैः कृतं त्वया देव हितं सुराणाम् ।
तथाद्य भूमेः कुरु भारहानिं प्रसीद विष्णो भगवन्नमस्ते ॥ १४॥

॥ इति श्री विष्णु स्तोत्रम् सम्पूर्णम ॥

आज का पंचांग ( Sat 08 Aug 2026 )

स्थान

अमृतसर, पंजाब, भारत

तिथि

  • दशमी, 07 Aug 2026 16:37:30 से 08 Aug 2026 13:59:47 तक
  • एकादशी, 08 Aug 2026 13:59:48 से 09 Aug 2026 11:05:32 तक

वार

शनिवार

नक्षत्र

  • रोहिणी, 07 Aug 2026 18:43:15 से 08 Aug 2026 16:51:15 तक
  • म्रृगशीर्षा, 08 Aug 2026 16:51:16 से 09 Aug 2026 14:43:26 तक

सूर्यौदय

08 Aug 2026 05:55:03

सूर्यास्त

08 Aug 2026 19:16:56

चंद्रोदय

08 Aug 2026 00:33:31

चंद्रस्थ

08 Aug 2026 15:38:27

योग

ध्रुव

07 Aug 2026 12:10:35 से 08 Aug 2026 09:01:39 तक

व्याघात

08 Aug 2026 09:01:40 से 09 Aug 2026 05:37:49 तक

हर्षण

09 Aug 2026 05:37:50 से 10 Aug 2026 02:04:08 तक

शुभ काल

अभिजीत मुहूर्त

  • 08 Aug 2026 12:09:12 से 08 Aug 2026 13:02:39 तक

अमृत काल

  • 08 Aug 2026 13:53:15 से 08 Aug 2026 15:21:47 तक

ब्रह्म मुहूर्त

  • 08 Aug 2026 04:18:53 से 08 Aug 2026 05:06:54 तक

अशुभ काल

राहू

  • 08 Aug 2026 09:15:31 से 08 Aug 2026 10:55:45 तक

यम गण्ड

  • 08 Aug 2026 14:16:13 से 08 Aug 2026 15:56:27 तक

कुलिक

  • 08 Aug 2026 05:55:03 से 08 Aug 2026 07:35:17 तक

दुर्मुहूर्त

  • 08 Aug 2026 07:41:57 से 08 Aug 2026 08:35:24 तक

वर्ज्यम्

  • 08 Aug 2026 09:28:15 से 08 Aug 2026 10:57:15 तक
  • 08 Aug 2026 21:57:16 से 08 Aug 2026 23:24:16 तक