॥ श्री कृष्ण स्तोत्र ॥
॥ Shri Krishna Stotra ॥
॥ ॐ गण गणपतये नमः ॥
महादेव उवाच ।
जयस्वरुपं जयदं जयेशं जयकारणम् ।
प्रवरं जयदानां च वन्दे तमपराजितम् ॥ १॥
विश्वं विश्वेश्वरेशं च विश्वेशं विश्वकारणम् ।
विश्वाधारं च विश्वस्थं विश्वकारणकारणम् ॥ २॥
विश्वरक्षाकारणं च विश्वघ्नं विश्वजं परम् ।
फलबीजं फलाधारं फलं च तत्फलप्रदम् ॥ ३॥
तेजःस्वरुपं तेजोदं सर्वतेजस्विनां वरम् ।
इत्येवमुक्त्वा तं नत्वा रत्नसिंहासने वरे ।
नारायणं च संभाष्य उवास स तदाज्ञया ॥ ४॥
इति शंभुकृतं स्तोत्रं यो जनः संयतः पठेत् ।
सर्वसिद्धिर्भवेत्तस्य विजयं च पदे पदे ॥ ५॥
संततं वर्धते मित्रं धनमैश्वर्यमेव च ।
शत्रुसैन्यं क्षयं याति दुःखानि दुरितानि च ॥ ६॥
॥ इति श्री कृष्ण स्तोत्रम् सम्पूर्णम् ॥
स्थान |
अमृतसर, पंजाब, भारत |
तिथि |
|
वार |
बुधवार |
नक्षत्र |
|
सूर्यौदय |
04 Feb 2026 07:25:47 |
सूर्यास्त |
04 Feb 2026 18:03:19 |
चंद्रोदय |
04 Feb 2026 20:46:19 |
चंद्रस्थ |
05 Feb 2026 09:14:18 |
योग |
|
अतिगण्ड |
04 Feb 2026 02:38:49 से 05 Feb 2026 01:04:19 तक |
सुकर्मा |
05 Feb 2026 01:04:20 से 06 Feb 2026 00:03:53 तक |
शुभ काल |
|
अमृत काल |
|
ब्रह्म मुहूर्त |
|
अशुभ काल |
|
राहू |
|
यम गण्ड |
|
कुलिक |
|
दुर्मुहूर्त |
|
वर्ज्यम् |
|