॥ श्री गुरु स्तोत्र ॥
॥ Shri Guru Stotra ॥
॥ ॐ गण गणपतये नमः ॥
अथ गुरुस्तोत्रम्
बृहस्पतिः सुराचार्यो दयावान् शुभलक्षणः ।
लोकत्रयगुरुः श्रीमान्सर्वज्ञः सर्वकोविदः ॥ १॥
सर्वेशः सर्वदाऽभीष्टः सर्वजित्सर्वपूजितः ।
अक्रोधनो मुनिश्रेष्ठो नीतिकर्ता गुरुः पिता ॥ २॥
विश्वात्मा विश्वकर्ता च विश्वयोनिरयोनिजः ।
भूर्भुवःसुवरों चैव भर्ता चैव महाबलः ॥ ३॥
पञ्चविंशतिनामानि पुण्यानि नियतात्मना ।
वसता नन्दभवने विष्णुना कीर्तितानि वै ॥ ४॥
यः पठेत् प्रातरुत्थाय प्रयतः सुसमाहितः ।
विपरीतोऽपि भगवान्प्रीतो भवति वै गुरुः ॥ ५॥
यश्छृणोति गुरुस्तोत्रं चिरं जीवेन्न संशयः ।
बृहस्पतिकृता पीडा न कदाचिद्भविष्यति ॥ ६॥
॥ इति श्री गुरु स्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥
स्थान |
अमृतसर, पंजाब, भारत |
तिथि |
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वार |
शनिवार |
नक्षत्र |
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सूर्यौदय |
08 Aug 2026 05:55:03 |
सूर्यास्त |
08 Aug 2026 19:16:56 |
चंद्रोदय |
08 Aug 2026 00:33:31 |
चंद्रस्थ |
08 Aug 2026 15:38:27 |
योग |
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ध्रुव |
07 Aug 2026 12:10:35 से 08 Aug 2026 09:01:39 तक |
व्याघात |
08 Aug 2026 09:01:40 से 09 Aug 2026 05:37:49 तक |
हर्षण |
09 Aug 2026 05:37:50 से 10 Aug 2026 02:04:08 तक |
शुभ काल |
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अभिजीत मुहूर्त |
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अमृत काल |
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ब्रह्म मुहूर्त |
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अशुभ काल |
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राहू |
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यम गण्ड |
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कुलिक |
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दुर्मुहूर्त |
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वर्ज्यम् |
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