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Shiv Kritam Shri Durga Stotra

॥ शिव कृतम् श्री दुर्गा स्तोत्र ॥
॥ Shiv Kritam Shri Durga Stotra ॥

॥ ॐ गण गणपतये नमः ॥

रक्ष रक्ष महादेवि दुर्गे दुर्गतिनाशिनि ।
मां भक्तमनुरक्तं च शत्रुग्रस्तं कृपामयि ॥ १॥
विष्णुमाये महाभागे नारायणि सनातनि ।
ब्रह्मस्वरूपे परमे नित्यानन्दस्वरूपिणी ॥ २॥

त्वं च ब्रह्मादिदेवानामम्बिके जगदम्बिके ।
त्वं साकारे च गुणतो निराकारे च निर्गुणात् ॥ ३॥
मायया पुरुषस्त्वं च मायया प्रकृतिः स्वयम् ।
तयोः परं ब्रह्म परं त्वं बिभर्षि सनातनि ॥ ४॥

वेदानां जननी त्वं च सावित्री च परात्परा ।
वैकुण्ठे च महालक्ष्मीः सर्वसम्पत्स्वरूपिणी ॥ ५॥
मर्त्यलक्ष्मीश्च क्षीरोदे कामिनी शेषशायिनः ।
स्वर्गेषु स्वर्गलक्ष्मीस्त्वं राजलक्ष्मीश्च भूतले ॥ ६॥

नागादिलक्ष्मीः पाताले गृहेषु गृहदेवता ।
सर्वसस्यस्वरूपा त्वं सर्वैश्वर्यविधायिनी ॥ ७॥
रागाधिष्ठातृदेवी त्वं ब्रह्मणश्च सरस्वती ।
प्राणानामधिदेवी त्वं कृष्णस्य परमात्मनः ॥ ८॥

गोलोके च स्वयं राधा श्रीकृष्णस्यैव वक्षसि ।
गोलोकाधिष्ठाता देवी वृन्दावनवने वने ॥ ९॥
श्रीरासमण्डले रम्या वृन्दावनविनोदिनी ।
शतशृङ्गाधिदेवी त्वं नाम्ना चित्रावलीति च ॥ १०॥

दक्षकन्या कुत्र कल्पे कुत्रकल्पे च शैलजा ।
देवमाता दितिस्त्वं च सर्वाधारा वसुन्धरा ॥ ११॥
त्वमेव गङ्गा तुलसी त्वं च स्वाहा स्वधा सती ।
त्वदंशांशांशकलया सर्वदेवादियोषितः ॥ १२॥

स्त्रीरूपं चापि पुरुषं देवि त्वं च नपुंसकम् ।
वृक्षाणां वृक्षरूपा त्वं सृष्टौ चाङ्कुररूपिणी ॥ १३॥
वह्नौ च दाहिका शक्तिर्जले शैत्यस्वरूपिणी ।
सूर्ये तेजस्वरूपा च प्रभारूपा च सन्ततम् ॥ १४॥

गन्धरूपा च भूमौ च आकाशे शब्दरूपिणी ।
शोभास्वरूपा चन्द्रे च पद्मसङ्घे च निश्चितम् ॥ १५॥
सृष्टौ सृष्टिस्वरूपा च पालने परिपालिका ।
महामारी च संहारे जले च जलरूपिणी ॥ १६॥

क्षुत् त्वं दया त्वं निद्रा त्वं तृष्णा त्वं बुद्धिरूपिणी ।
तुष्टिस्त्वं चपि पुष्टिस्त्वं श्रद्धा त्वं च क्षमा स्वयम् ॥ १७॥
शान्तिस्त्वं च स्वयं भ्रान्तिः कान्तिस्त्वं कीर्तिरेव च ।
लज्जा त्वं च तथा माया भुक्तिमुक्तिस्वरूपिणी ॥ १८॥

सर्वशक्तिस्वरूपा त्वं सर्वसंपत्प्रदायिनी ।
वेदेऽनिर्वचनीया त्वं त्वां न जानाति कश्चन ॥ १९॥
सहस्रवक्त्रस्त्वां स्तोतुं न शक्तः सुरेश्वरि ।
वेदाः न शक्ताः को विद्वान् न च शक्ता सरस्वती ॥ २०॥

स्वयं विधाता शक्तो न न च विष्णुः सनातनः ।
किं स्तौमि पञ्चवक्त्रेण रणत्रस्तो महेश्वरि ।
कृपां कुरु महामाये मम शत्रुक्षयं कुरु ॥ २१॥

॥ इति श्री दुर्गा स्तोत्रं संपूर्णम् ॥

आज का पंचांग ( Sun 22 Mar 2026 )

स्थान

अमृतसर, पंजाब, भारत

तिथि

  • चतुर्थी, 21 Mar 2026 23:56:56 से 22 Mar 2026 21:17:05 तक
  • पंचमी, 22 Mar 2026 21:17:06 से 23 Mar 2026 18:38:51 तक

वार

रविवार

नक्षत्र

  • भरणी, 22 Mar 2026 00:37:47 से 22 Mar 2026 22:42:39 तक
  • कृत्तिका, 22 Mar 2026 22:42:40 से 23 Mar 2026 20:49:37 तक

सूर्यौदय

22 Mar 2026 06:36:06

सूर्यास्त

22 Mar 2026 18:39:12

चंद्रोदय

22 Mar 2026 08:13:41

चंद्रस्थ

22 Mar 2026 22:36:51

योग

वैधृति

21 Mar 2026 19:00:54 से 22 Mar 2026 15:41:22 तक

विष्कुम्भ

22 Mar 2026 15:41:23 से 23 Mar 2026 12:21:48 तक

शुभ काल

अभिजीत मुहूर्त

  • 22 Mar 2026 12:13:30 से 22 Mar 2026 13:01:42 तक

अमृत काल

  • 22 Mar 2026 18:42:47 से 22 Mar 2026 20:11:06 तक

ब्रह्म मुहूर्त

  • 22 Mar 2026 04:59:58 से 22 Mar 2026 05:47:55 तक

अशुभ काल

राहू

  • 22 Mar 2026 17:08:47 से 22 Mar 2026 18:39:10 तक

यम गण्ड

  • 22 Mar 2026 12:37:38 से 22 Mar 2026 14:08:01 तक

कुलिक

  • 22 Mar 2026 15:38:24 से 22 Mar 2026 17:08:47 तक

दुर्मुहूर्त

  • 22 Mar 2026 17:02:42 से 22 Mar 2026 17:50:54 तक

वर्ज्यम्

  • 22 Mar 2026 09:27:47 से 22 Mar 2026 10:55:47 तक