॥ आरती श्री विन्ध्येश्वरी जी की ॥
॥ Aarti Shri Vindheshvari Ji Ki ॥
सुन मेरी देवी पर्वत वासिनी तेरा पार न पाया ॥ टेक.॥
पान सुपारी ध्वजा नारियल ले तरी भेंट चढ़ाया । सुन.।
सुवा चोली तेरे अंग विराजे केसर तिलक लगाया । सुन.।
नंगे पग अकबर आया सोने का छत्र चढ़ाया । सुन.।
उँचे उँचे पर्वत भयो दिवालो नीचे शहर बसाया । सुन.।
कलियुग द्वापर त्रेता मध्ये कलियुग राज सबाया । सुन.।
धूप दीप नैवेद्य आरती मोहन भोग लगाया । सुन.।
ध्यानू भगत मैया तेरे गुण गावैं मनवांछित फल पाया । सुन.।
॥ इति श्री विन्ध्येश्वरी आरती सम्पूर्णम ॥
स्थान |
अमृतसर, पंजाब, भारत |
तिथि |
|
वार |
बुधवार |
नक्षत्र |
|
सूर्यौदय |
04 Mar 2026 06:58:22 |
सूर्यास्त |
04 Mar 2026 18:26:32 |
चंद्रोदय |
04 Mar 2026 19:30:13 |
चंद्रस्थ |
05 Mar 2026 07:40:40 |
योग |
|
धृति |
03 Mar 2026 10:24:16 से 04 Mar 2026 08:52:11 तक |
शूल |
04 Mar 2026 08:52:12 से 05 Mar 2026 07:45:22 तक |
शुभ काल |
|
अमृत काल |
|
ब्रह्म मुहूर्त |
|
अशुभ काल |
|
राहू |
|
यम गण्ड |
|
कुलिक |
|
दुर्मुहूर्त |
|
वर्ज्यम् |
|