॥ आरती श्री चित्रगुप्त महाराज की ॥
॥ Aarti Shri Chitragupta Maharaj Ki ॥
श्री विरंचि कुलभूषण, यमपुर के धामी।
पुण्य पाप के लेखक, चित्रगुप्त स्वामी॥ १ ॥
सीस मुकुट, कानों में कुण्डल अति सोहे।
श्यामवर्ण शशि सा मुख, सबके मन मोहे॥ २ ॥
भाल तिलक से भूषित, लोचन सुविशाला।
शंख सरीखी गरदन, गले में मणिमाला॥ ३ ॥
अर्ध शरीर जनेऊ, लंबी भुजा छाजै।
कमल दवात हाथ में, पादुक परा भ्राजे॥ ४ ॥
नृप सौदास अनर्थी, था अति बलवाला।
आपकी कृपा द्वारा, सुरपुर पग धारा॥ ५ ॥
भक्ति भाव से यह आरती जो कोई गावे।
मनवांछित फल पाकर सद्गति पावे॥ ६ ॥
॥ आरती श्री चित्रगुप्त महाराज की ॥
स्थान |
अमृतसर, पंजाब, भारत |
तिथि |
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वार |
बुधवार |
नक्षत्र |
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सूर्यौदय |
04 Feb 2026 07:25:47 |
सूर्यास्त |
04 Feb 2026 18:03:19 |
चंद्रोदय |
04 Feb 2026 20:46:19 |
चंद्रस्थ |
05 Feb 2026 09:14:18 |
योग |
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अतिगण्ड |
04 Feb 2026 02:38:49 से 05 Feb 2026 01:04:19 तक |
सुकर्मा |
05 Feb 2026 01:04:20 से 06 Feb 2026 00:03:53 तक |
शुभ काल |
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अमृत काल |
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ब्रह्म मुहूर्त |
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अशुभ काल |
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राहू |
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यम गण्ड |
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कुलिक |
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दुर्मुहूर्त |
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वर्ज्यम् |
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