॥ आरती बृहस्पति देव की ॥
॥ Aarti Brahaspati Dev Ki ॥
जय बृहस्पति देवा, ऊँ जय बृहस्पति देवा ।
छि छिन भोग लगाऊँ, कदली फल मेवा ॥१॥
तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी ।
जगतपिता जगदीश्वर, तुम सबके स्वामी ॥२॥
चरणामृत निज निर्मल, सब पातक हर्ता ।
सकल मनोरथ दायक, कृपा करो भर्ता ॥३॥
तन, मन, धन अर्पण कर, जो जन शरण पड़े ।
प्रभु प्रकट तब होकर, आकर द्घार खड़े ॥४॥
दीनदयाल दयानिधि, भक्तन हितकारी ।
पाप दोष सब हर्ता, भव बंधन हारी ॥५॥
सकल मनोरथ दायक, सब संशय हारो ।
विषय विकार मिटाओ, संतन सुखकारी ॥६॥
जो कोई आरती तेरी, प्रेम सहत गावे ।
जेठानन्द आनन्दकर, सो निश्चय पावे ॥७॥
॥ इति आरती बृहस्पति देव सम्पूर्णम ॥
स्थान |
अमृतसर, पंजाब, भारत |
तिथि |
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वार |
बुधवार |
नक्षत्र |
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सूर्यौदय |
23 Sep 2026 06:23:05 |
सूर्यास्त |
23 Sep 2026 18:22:22 |
चंद्रोदय |
23 Sep 2026 16:35:58 |
चंद्रस्थ |
24 Sep 2026 03:45:39 |
योग |
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सुकर्मा |
22 Sep 2026 16:28:52 से 23 Sep 2026 16:26:29 तक |
धृति |
23 Sep 2026 16:26:30 से 24 Sep 2026 15:54:11 तक |
शुभ काल |
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अमृत काल |
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ब्रह्म मुहूर्त |
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अशुभ काल |
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राहू |
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यम गण्ड |
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कुलिक |
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दुर्मुहूर्त |
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वर्ज्यम् |
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